श्री रूपेश कुमार : कुक्कुट पालन द्वारा गाँव के लोगों की सामाजिक, आर्थिक स्तर में सुधार करने के लिए संस्थान के तकनीकी प्रसार अनुभाग ने बरेली जनपद के बिथरी चैनपुर विकास-खण्ड में ग्राम-पंचायत नवदिया हरकिशना को अंगीकृत करके प्रसार कार्य प्रारंभ किया है। संस्थान के तकनीकी प्रसार अनुभाग के स्टॉफ सदस्यों, ग्राम प्रधान तथा किसानों के साथ कई बैठकें करके नवदिया हरकिशन गाँव के किसानों को कुक्कुट पालन करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके बाद प्रेरित किसानों के एक समूह को इस आशय के साथ संस्थान में लाया गया ताकि उन्हें संस्थान के फार्मों का भ्रमण कराकर के कुक्कुट पालन के बारे में उनको बेहतर ढंग से समझाया जा सके। उसी गाँव के कुछ किसानों ने कुक्कुट उत्पादन के बारे में प्रशिक्षण प्राप्त किया। तदनन्तर श्री रूपेश कुमार नामक एक किसान ने कुक्कुट पालन शुरू करने का निर्णय लिया और गाँव में ही इस अनुभाग के वैज्ञानिकों के मार्गदशर्न में एक लघु कुक्कुट फार्म स्थापित करने का निश्चय किया। उन्होंने वैज्ञानिकों के मार्गदशर्न में 1000 ब्रायलर पालन करने के लिए स्थानीय उपलब्ध सामग्रियों का प्रयोग करते हुए कम लागत वाले छप्पर का एक कुक्कुट आवास बनाया। कार्य प्रारंभ करने के लिए संस्थान द्वारा धनराजा ब्रायलर के 282 एक दिवसीय चूजें उन्हें प्रदान किया गया। श्री रूपेश कुमार ने इससे संबंधित सभी खर्च वहन किए, उन्होंने इन चूजों को 7 सप्ताह तक पाला और 7 सप्ताह में चूजों का शरीर भार 2.33 कि.ग्रा./ब्रायलर हो गया। उन्होंने परिपक्व पक्षियों को रू. 67.00/- कि.ग्रा. की दर से बेच दिया तथा 7वें सप्ताह में उन्होंने रू. 5000/- का लाभ कमाया। यह उनका कुक्कुट पालन से प्राप्त पहला आर्थिक लाभ था, जिससे पेरित होकर उन्होंने अपने फार्म में पक्षी समूह की संख्या को बढ़ाया। अब वे एक सफल लघु कुक्कट फार्म के मालिक हैं तथा कुक्कुट पालन को अतिरिक्त रोजगार के रूप में अपनाया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने अपने फार्म पर एक व्यक्ति को पूर्ण कालिक रोजगार भी प्रदान किया है।

श्री शकील अहमद : श्री शकील अहमद निवासी फिरोजपुर मियो, तहसील पुनहाना, जिला मेवात (हरियाणा) दो वर्ष पहले इस संस्थान के सम्पर्क में आये और टर्की पालन के लिए उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर की। यधपि वे पहले से ही कारी जनन-द्रव्य की सहायता से बटेर पालन का कार्य कर रहे है। उन्होंने वर्ष 2009 के दौरान कारी इज्जतरगर से टर्की पालन से संबंधित सभी एकमुश्त कार्यों की जानकारी एकत्र किया तथा 500 टर्की चूजों से टर्की पालन का कार्य आरम्भ किया। प्रति वर्ष वें 500 टर्की चूजों के दो लाटो को पालते हैं। उन्होंने सीएआरआई द्वारा विकसित टर्की पालन की प्रोद्योगिकीं को अपनाया है तथा टर्की पालन का कार्य सफलतापूर्वक कर रहे है और जीवित टर्की पक्षियों को बेचकर रू0 1.50 लाख वार्षिक लाभ कमा रहे है। वर्तमान में वे टर्की की स्थानीय मांग को पूरा करते हुए अपने परिवार की सामाजिक, आर्थिक स्थिति में सुधार रहे हैं। टर्की पालन को बृहत रूप में अपनो की उनकी भावी योजना है।

मो. शफीक सिद्धिकी : निवासी कमल नयनपुर, शाहजहाँपुर (उत्तर प्रदेश) ने सीएआरआई के वैज्ञानिकों के मार्गदशर्न में 1995 के दौरान रू0 50000/- की लागत से 1000 पक्षियों का लघु पैमाने पर कुक्कुट पालन का कार्य प्रारंभ किया। वर्तमान में उनके कुक्कुट फार्म में पक्षियों की संख्या लगभग 5000 तक पहुंच चुकी है। अपने इस उद्यम से वे रू 3.50 से 4.00 लाख का लाभ प्रति वर्ष कमा रहे हैं। कुक्कुट पालन से संबंधित नवीनतम तकनीकों को अपने फार्म में अपनाने के लिए इस संस्थान द्वारा उनको ''बेस्ट प्रोग्रेसिव पोल्ट्री फार्मर'' का पुरस्कार भी प्रदान किया जा चुका है।

पुनीत सिन्हा : (आयु 35 वर्ष, शैक्षिक योग्यता 8वीं पास) निवासी ग्राम-नसेरा, जिला बदायूँ के एक सफल कुक्कुट पालक हैं। वे 45 दिनों के प्रति चक्र में 1500 पक्षियों से एक सफल ब्रायलर फार्म चला रहे हैं। वे सीएआरआई के वैज्ञानिकों द्वारा उपलब्ध कराए गए आहार सूत्रों के अनुसार आहार संघटकों को मिश्रित कर तैयार कर रहे हैं। उन्होंने उचित कीमत पर घर पर आहार तैयार करने की भी व्यवस्था की है। कुक्कुट बीमारियों की रोकथाम, उपचार तथा सामान्य प्रबंधन की अन्य तकनीकी सहायता भी उनको प्रदान की गई। इस समय वे 8000 से 10,000 तक प्रतिमाह कमा रहे हैं। वे फार्म के आकार को बढ़ाना चाहते हैं।

श्री संजीव सरकार : (आयु 32 वर्ष शैक्षिक योग्यता बी-कॉम), ग्राम चन्दुइया, पूरनपुर, जनपद पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) के एक सफल ब्रायलर पालक हैं तथा सीएआरआई से कुक्कट पालन में प्रशिक्षण प्राप्त कर वर्ष 1995 में सीमित पूंजी और भूमि के साथ ब्रोकोली धनराजा के 100 ब्रायलरों से कुक्कुट पालन का कार्य आरम्भ किया। इस समय वे 1500 ब्रायलर/प्रति चक फार्म के मालिक हैं। वे कारी जनन-द्रव्यों तथा तकनीकी सहायता के लिए हमेशा सीएआरआई के सम्पर्क में रहते हैं। व्यावसायिक ब्रायलर पालन के अतिरिक्त वे कॉमर्शियल फीड तथा पोल्ट्री मेडिसिन्स की एजेन्सियों का कार्य भी ले रखा है। इस समय उनकी वार्षिक आय लगभग 3.5 लाख है।

श्री अनिरूद्ध तिवारी : (आयु 63 वर्ष, शैक्षिक योग्यता- बी.ए.,एल.एल.बी,) ग्राम भीमपुर, डाक व जिला देवरिया (उत्तर प्रदेश) अपने वकालत के व्यवसाय में निराश होने तथा 250 ब्रायलरों से कुक्कुट पालन में बुरी तरह से असफल होने के बाद पुन: उन्होंने सीएआरआई से कुक्कुट पालन में प्रशिक्षण प्राप्त किया और वर्ष 2005 से 250 ब्रायलर पक्षियों से कुक्कट पालन का कार्य पुन: प्रारंभ किया। इस समय वे आहार सूत्रीकरण तथा स्वास्थ्य प्रबंधन सहित सभी प्रकार की तकनीकी सहायता के लिए सीएआरआई के वैज्ञानिकों से सम्पर्क बनाए हुए है। वर्तमान में 2500 ब्रायलरों/45 से 50 दिनों के चक के कुक्कुट फार्म तथा एक मिनी फीड मिल के वे मालिक है। एक सफल ब्रायलर पालक होने के बाद उन्होंने स्थानीय कुक्कुट पालकों को तकनीकी सहायता देना शुरू किया है तथा स्थानीय किसानों एवं सीएआरआई के वैज्ञानिकों के बीच इस प्रकार की तकनीकी सहायता के लिए सम्पर्क सूत्र के रूप में काम कर रहे हैं। वर्तमान में उनकी वार्षिक आय लगभग 3 लाख रू. है।

श्री मनोज भट्ट : (आयु 32 वर्ष, ग्राम चन्दानी, डाक वनबसा जिला चम्पावत (उत्तराखण्ड) ने 2 वर्ष पहले सीएआरआई के वैज्ञानिकों के परिवेक्षण और परामर्श् के अन्तर्गत स्वरोजगार के रूप में 5 कुन्तल क्षमता वाले एक 'मिनी फीड मील' के साथ 3000 ब्रायलर पक्षियों से ब्रायलर पालन का कार्य प्रारम्भ किया था। इस समय उन्होंने अपने फार्म का आकार बढ़ा लिया है तथा ब्रायलर पक्षियों की संख्या 12000-15000 ब्रायलर प्रति चक तक कर दिया है। अपने लिए कुक्कुट फीड बनाने के साथ-साथ वे स्थानीय कुक्कुट पालकों की फीड आवशयकता को भी पूरा कर रहे हैं। इस व्यवसाय से उनको प्रतिवर्ष लगभग रू0 7 लाख का आर्थिक लाभ हो रहा है।

श्री नेम सिंह : (आयु 35 वर्ष, शैक्षिक योग्यता 9वीं पास, ग्राम देवचरा, जिला-बरेली) एक सफल ब्रायलर पालक हैं। उन्होंने इस संस्थान के वैज्ञानिको के मार्गदशर्न में वर्ष 2002 के दौरान 500 ब्रायलरों से ब्रायलर पालन का कार्य प्रारम्भ किया। उनके परिवार में 16 सदस्य हैं तथा उनके पास लगभग 1 एकड़ भूमि है। वर्ष 2004 के दौरान उन्होंने इस संस्थान से कुक्कुट पालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा इस समय उनके पास 8000 ब्रायलरों की विकसित संरचनात्मक सुविधाएँ है, किन्तु वे लगभग 5000 ब्रायलरों (45 दिन/चक) के पालन का कार्य कर रह हैं। वे अपने फार्म पर ही कुक्कुट आहार तैयार करते है, उनके पास एक मिनी फीड मील (3 कुन्तल क्षमता वाली) भी है, जिससे वे कुक्कुट आहार को प्रसंस्कृत करते हैं। इसके अतिरिक्त, उनके पास मछली पालन के लिए लगभग 8 एकड़ क्षेत्र का एक तालाब भी है। वर्तमान में उनकी वार्षिक आय लगभग 12 लाख रू है, जिनमें से रू0 6 लाख की आय कुक्कुट पालन से प्राप्त होती है। अपने व्यवसाय में उन्होंने 5 और लोगों को रोजगार दिया है। वे ब्रायलर पालन में चूजों की आपूर्ति, आहार मिश्रित करके प्रबंधकीय उपायों तथा औषधिया देकर अपने ही गाँव के 12 अन्य सीमान्त किसान परिवारों की भी मदद कर रहे है। उनकी इस सफलता से प्रेरित होकर कई अन्य बडे़ कृषकों ने भी कुक्कुट पालन की ओर रूख किया है। उनकी योजना है, कि अगले 10 वर्षो के अन्तर्गत एक कॉमर्शियल फीड प्लान्ट की स्थापना की जाए तथा फार्म के आकार को 50,000 ब्रायलर पक्षियों तक बढा़या जाए।