View English website... होम :: हमसे संपर्क करें :: साइटमैप
भा. कृ. अनु. प. - केन्द्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान
ICAR - CENTRAL AVIAN RESEARCH INSTITUTE
AN ISO 9001:2008 CERTIFIED INSTITUTE
Please click to view website in English......
महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ होम :महत्वपूर्ण उपलब्धियां
आर्थिक महत्व के विविध पक्षी प्रजातियों की उत्पादकता में वृद्धि :
  1. जापानी बटेर की उन्नत प्रजातियों जैसे-मांस वाली बटेर कारी उत्तम (5 सप्ताह की आयु पर शरीर भार 240 ग्राम); अण्डे देने वाली बटेर-कारी पर्ल (295 अण्डे/वार्षिक) का विकास किया गया तथा उन्हें देश के सभी भागों में प्रसारित किया गया।
  2. वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक रंग की पक्षति वाली बटेर की प्रजातियों जैसे-सफेद वक्ष वाली कारी उज्जवल, भूरे रंग की पृच्छ तथा सफेद पृच्छ वाली-कारी सुनहरी एवं पूरी तरह से सफेद पक्षति वाली-कारी श्वेता का विकास किया गया।
  3. टर्की की उन्नति प्रजातियों जैसे-कारी विराट (16 सप्ताह की आयु में नर पक्षी का शरीर भार लगभग 5 कि.ग्रा. तथा मादा पक्षी का शरीर भार लगभग 3.3. कि.ग्रा.) को विकसित कर आपूर्ति किया गया।
  4. गिनी फाउल की तीन उन्नत प्रजातियां जैसे- कादम्बरी, चिताम्बरी तथा श्वेताम्बरी (12 सप्ताह की आयु पर शरीर भार लगभग 1 कि.ग्रा.) को विकसित कर ग्रामीण क्षेत्रो में प्रसारित किया गया।
  5. ग्रामीण कुक्कुट उत्पादन को बढा़वा देने के लिए कम निवेश वाली देशी मुर्गी की उन्नत प्रजातियों जैसे-कारी निर्भीक, कारी श्यामा, कारी उपकारी, कारी हितकारी को विकसित कर तथा उनका क्षेत्र परीक्षण कर प्रसारित किया गया।
  6. उष्णकटिबंधीय जलवायु को सहन करने वाली ब्रायलर स्टॉक जैसे-कारी ट्रॉपिकाना को विकसित करने के लिए नेकडनेक तथा फ्रिजिल के जीनों को इंट्रोग्रेस किया गया।
  7. संस्थान में देशी मुर्गी की अंकलेशवर तथा निकोबारी नस्लों एवं वनराजा के पैरेन्ट स्टॉक पर अनुसंधान कार्य प्रारंभ किया गया।
  8. बत्तख की चार नस्लों जैसे-खाकी कैम्पबेल, हवाइट पेकिन, देशी तथा देशज मोती को क्षेत्रीय केन्द्र, के.प.अ.सं, भुवनेश्वर, ओडि़सा के समुद्र तटीय क्षेत्रों में प्रसारित किए जा रहें है। इसके अतिरिक्त् उनके लिए पौषणिक पैकेज विकसित किए गए तथा कृत्रिम गर्भाधान की तकनीकी का मानकीकृत किया गया।
  9. उत्कृष्ट प्रदर्शन युक्त दोहरे उद्देश्य वाली रंगीन मुर्गी की प्रजाति-कारी देबेन्द्रा को लोकप्रिय किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी बहुत अधिक मांग है।
  10. संस्थान में अभी हाल में विविधीकृत कुक्कुट प्रजाति के एक नए पक्षी 'ईमू' पर अनुसंधान कार्य शुरू किया गया है।
  11. मुर्गी की लेयर संकर नस्ल-कारी पिया (300 अण्डे/वार्षिक तथा 40 सप्ताह की आयु पर अण्डा भार 57.4 ग्राम) 31वें आर.एस.पी.पी.टी. (बंगलोर) में सर्वोच्च स्थान पर थी (अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना संघटक)।
  12. वर्ष 2009 के दौरान ब्रायलर की संकर नस्ल कारीब्रो विशाल (6 सप्ताह की आयु पर 1.7 कि.ग्रा.) 30वें आर.एस.पी.पी.टी. (गुड़गाँव) में सर्वोच्च् स्थान पर था (अ.भा.स.अनु.प.संघटक)
  13. संस्थान में विकसित बहुरंगीन व्यावसायिक ब्रायलर स्टॉक जैसे-कारीब्रो धनराजा को विकसित किया गया तथा अधिक उत्पाद वाले मुर्गी के अन्य जनन-द्रव्र्यों के साथ लोकप्रिय किया गया।
पक्षी जैव प्रोद्योगिकी :
  1. आधुनिक आण्विक मार्करों का प्रयोग करते हुए आण्विक स्तर पर कुक्कुट नस्लों प्रजातियों/वंशावलियों का चरित्रीकरण किया गया।
  2. रोग प्रतिरोधकता, उष्णकटिबंधीय अनुकूलता तथा वृद्धि में कण्डीडेट जीनों को पहचानने के लिए ब्रायलर तथा लेयर में विशिष्ट इम्यूनो-डाइवर्जेन्ट वंशावलीयों को विकसित किया गया।
  3. कुल लगभग 25% कण्डीडेट जीनों जैसे-साइटोकिन्स MHC, TLRs, cGHR, IGF-I, TGF-B2 मायोस्टेटिन तथा Bmp2 आदि का अध्ययन किया गया।
  4. रिकॉम्बीनेन्ट साइटोकिन को एडजुएन्ट तथा ग्रोथ प्रमोटर के रूप में उपयोग करने के लिए उत्पन्न किया गया।
  5. AL/SB रोधकता अतिसंवेदनशीलता के प्रति आनुवंशिकता प्रतिरोधकता पर अनुसंधान कार्य किया गया।
  6. लिपोफैक्सन-REMI के द्वाराट्रांसजेंनिक शुक्राणुओं का विकास किया गया (जवाहर लाल नेहरू पुरस्कार प्राप्त)।
आहार पुनरोत्पादन तथा प्रबंधन कार्यो के पैकेज:
  1. उत्कृष्ट स्टॉकों की पौषणिक आवश्यकता सुनिश्चित की गई। मित्तव्ययी तथा संतुलित कुक्कुट राशन तैयार करने के लिए परम्परागत एवं जैव-रासायनिक उपायों द्वारा विषैलेपन को दूर करके तथा पोषण जैव उपलब्धता में वृद्धि करके वैकल्पिक आहार स्त्रोतों के पौषणिक मान का मूल्यांकन किया गया।
  2. न्यूनतम लागत से कुक्कुट राशन तैयार करने के लिए विंडोज आधारित सॉफ्टवेयर ''मेक फीड पोल्ट्री'' को विकसित तथा अपडेट किया गया (250 प्रतियों की बिक्री हो चुकी) है।
  3. आहारीय हस्तक्षेप के द्वारा कम कोलेस्ट्रोल वाले डिजाइनर अण्डों का उत्पादन किया गया।
  4. अण्डे के छिल्के की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए MHS फीडिंग के द्वारा ऊष्मा दबाव (हीट स्ट्रेस) को कम किया गया।
  5. बटेर में उच्च जननक्षम नरों का चयन करने के लिए एक साधारण जनन क्षमता कथन परीक्षण को विकसित किया गया।
  6. बटेर में कृत्रिम गर्भाधान तकनीक को विकसित किया गया।
  7. ग्रामीण/आदिवासी क्षेत्रों में मुर्गी पालन के लिए स्थानीय उपलब्ध सामग्रियों का प्रयोग करते हुए कम लागत वाले कुक्कुट आवासों को तैयार करने हेतु आदर्श् डिजाइन तैयार की गई।
  8. ब्रायलर मुर्गियों में हैच के बाद अच्छी वृद्धि तथा प्रतिरक्षा अनुक्रिया प्राप्त करने के लिए इंक्यूबे्शन के दौरान इन ओवो वि-िध से पोषकों को इंजेक्शन देने की तकनीक विकसित की गई।
  9. मुर्गी तथा बटेर के लिए एक नया वीर्य तनुकारक विकसित किया गया।
  10. विविधीकृत कुक्कुट के लिए ब्रूडिंग तथा फीडिंग स्थान एवं फर्श् धनत्व की आवशयकताओं को आशाजनक बनाया गया।
प्रसंस्करण मूल्यवर्द्धन, गुणवत्ता सुनिश्चियन तथा विपणन :
  1. कुक्कुट मांस तथा अण्डे पर आधारित लगभग दो दर्जन से अधिक कुक्कुट उत्पादों को तैयार करने के साथ-साथ उनकी भण्डारण अवधि में वृद्धि करने के लिए उपयुक्त पैकेजिंग पद्धति की प्रौद्योगिकी विकसित की गई।
  2. कुक्कुट आहार तथा उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कुछ संभावित पेस्टीसाइट (BHC, DDT, एलड्रिनडाइ एल्ड्रिन, क्लोशपाइरोहास, मैलाथिआँन आदि) तथा भारी धातुओं (आर्सेनिकलेड, कैडमियम, कॉपर, मॉलिब्डेनम आदि) के अपशिष्टों का डाटा बेस तैयार किया गया।
  3. अण्डे तथा मांस लोथ में संदूषण दूर करने की तकनीक में सालमोनेल्ला तथा ई-कोलाई (विषैले जनित) का पता लगाने के लिए पीसीआर आधारित तकनीकों को विकसित किया गया।
  4. प्रमुख थोक बाजारों में कुक्कुट अण्डे तथा मांस एवं इनके सहयोगी उप-उत्पादों की कीमतो में उतार-चढा़व का अध्ययन किया गया।
  5. उत्कृष्ट एवं अद्धर् नगरीय क्षेत्रों में कुक्कुट उत्पादों के सन्दर्भ में विपणन श्रृंखलाओं एवं उपभोक्ताओं की वरीयताओं का अध्ययन किया गया।
संविदा अनुसंधान के लिए समझौता करारों पर हस्ताक्षर :
  1. मैसर्स एम.ए.एच. वाई.सी.ओ., मुम्बई-बी.टी.कॉटन, बी.टी. बिन्जल, बीटी-राइस
  2. मैसर्स एम.ओ.एन.एस.टी.एन.ओ., नई दिल्ली, बीटी कॉटन्स-1
  3. मैसर्स पी.एन.पी. एण्ड एसोसिएट् प्रा.लि., फरीदाबाद, इण्डिस् प्रान-डी
  4. मै0 राष्ट्रीय केमिकल एण्ड फरिलाइजर्स लिमिटेड, नई दिल्ली, चिकटॉन।