प्रमुख उपलब्धियाँ
देशी, विदेशी तथा संकर नस्ल की बत्तखों का प्रदर्शन मूल्यांकन :
  1. 72 सप्ताह की आयु तक डक डे अण्डा उत्पादन के लिए खाकी कैम्पबेल (K), देशी (D) तथा उनकी दो अन्योन्याश्रित संकर नस्लों (DK तथा KD) का तुलनात्मक मूल्यांकन करने पर पता चला कि DK संकर नस्ल से सर्वाधिक अण्डे (220.09) का उत्पादन प्राप्त हुआ, उसके बाद KD से (188.42), K से (170.45) तथा D से (165.23) उत्पादन प्राप्त हुआ। अण्डों का भार D, K, KD तथा DK में क्रमशः 70.22, 70.18, 69.64, 72.38 ग्राम था। आनुवंशिक समूहों के बीच विभिन्न आयु मापन पर शरीर भार तथा अण्डा भार में सार्थक अन्तर पाया गया। D, K, KD तथा DK में 72 सप्ताह की आयु पर क्रमशः 86.23, 91.03, 92.13 तथा 91.35 हॉ-यूनिट की गणना की गई।
  2. देशी,(D), खाकी कैम्पबेल (K) तथा व्हाइट पेकिन (W) बत्तख की नस्लों को शामिल करते हुए एक 3X3 डायलिल संकरण से विभिन्न आनुवंशिक समूहों के बीच 40 तथा 60 सप्ताह की आयु पर अण्डा भार तथा शरीर भार में सार्थक अंतर दिखाई दिये। शुद्ध नस्लों की अपेक्षा संकर नस्लों में 20-60 सप्ताह की आयु तक मृत्यु-दर प्रतिशत कम था। विभिन्न आनुवंशिक समूहों में अण्डा उत्पादन तथा मृत्यु दर को देखने से पता चलता है कि DW संकर नस्ल के पक्षी दोहरे उद्देश्य के लिए सर्वोत्तम पाए गए तथा DK संकर नस्ल पक्षी अण्डा देने में सर्वोत्तम पाया गया।
कारी देबेन्द्रा का प्रदर्शन :
  1. रंगीन पक्षति की दोहरे उद्देश्य वाली मुर्गी की पैतृक वंशावली जैसे-कारी देबेन्द्रा को क्षेत्र में लोकप्रिय करने के लिए क्षेत्रीय केन्द्र में अनुरक्षित किया गया। इस पक्षी का ओडिसा के गाँवं में सघन, अर्द्धसघन तथा मुक्त कुक्कुट पालन पद्धतियों में बहुत अच्छी प्रकार से विकास हुआ। सघन तथा मुक्त पद्धतियों के अन्तर्गत 20 सप्ताह की आयु पर इस पक्षी का शरीर भार क्रमशः 2596.38 तथा 2054.86 ग्राम था। मुर्गी पालन की सघन तथा मुक्त पद्धतियों के अन्तर्गत 60 सप्ताह की आयु तक हेन डे के आधार पर अण्डा उत्पादन क्रमशः 156 तथा 123 अण्डे दर्ज किए गए।
बत्तखो की पौषणिक आवश्यकता :
  1. देशी नस्ल की बत्तखों के आहार में 0-8 सप्ताह की आयु के दौरान क्रुड प्रोटीन 22: तथा 2700 कि.कै.एम.ई./कि.ग्रा. देने से वृद्धि तथा आहार रूपान्तरण आशाजनक पाया गया।
  2. 9-16 सप्ताह की आयु के दौरान देशी नस्ल की बत्तखों को आहार में प्रोटीन 16: तथा 2500 कि.कै.एमई./कि.ग्रा. देने से वृद्धि तथा आहार रूपान्तरण आशाजनक पाया गया।
  3. अण्डा देने के दौरान क्रुड प्रोटीन 18: तथा 2750 कि.कै.एम.ई./कि.ग्रा.से युक्त आहार देने पर आशाजनक अण्डा उत्पादन पाया गया।
कसावा (मैनीहॉट इस्कूलेन्ट क्रोनटज) का उपयोग :
  1. बत्तख के आहार में मक्के के स्थान पर कसावा टयूबर मील को 40: तक प्रयोग किया जा सकता है तथा इससे ब्रायलर के प्रदर्शन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।
  2. कसावा टयूबर मील को पानी में डुबोकर (भिगोकर) तथा सुखाकर उसके अन्दर के विषैलेपन को दूर करने से उसकी पौषणिक उपयोगिता पर कोई अतिरिक्त प्रभाव नहीं पड़ता है।
  3. मक्के के स्थान पर कसावा टयूबर मील को 100: तक प्रयोग करने से हवाइट पेकिन बत्तखों के प्रदर्शन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।
बैकयार्ड कुक्कुट पालन के लिए उपलब्ध आहार स्राेतों की पहचान तथा उपयोग :
  1. बैकयार्ड कुक्कुट पालन पद्धति के अन्तर्गत पाले जाने वाले पक्षियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले विभिन्न आहार संघटकों की पहचान की गई तथा उनके पौषणिक मानों को निर्धारित किया गया।
  2. मुक्तांगन पद्धति में पाले जाने वाले पक्षियों के आहार में 7.6 से 11.8: तक प्राेटीन की कमी देखी गई।
  3. ब्रूडिंग तथा अण्डा देने के शुरूआती दिनों के दौरान कृटिकल इनपुट्स के सम्पूरण से लाभदायक परिणाम देखे गए।
  4. लघु, सीमान्त तथा भूमिहीन मजदूर परिवारों की महिलाओं द्वारा बैकयार्ड कुक्कुट पालन का अधिकांश कार्य किया जाता है।
  5. बैकयार्ड कुक्कुट पालन पद्धति में दोहरे उद्देश्य वाले पक्षियों की उत्पादन संभावनाओं का मूल्यांकन करने के लिए और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।
बत्तख पुनरोत्पादन :
  1. खाकी कैम्पबेल, हवाइट पेंकिन तथा मस्कोवी बत्तखों से वीर्य एकत्रण की तकनीक को मानकीकृत किया गया।
  2. बत्तख आहार में विटामिन ई तथा सेलेनियम को एक निश्चित भाग तक मिलाने से अण्डा उत्पादन, जनन क्षमता तथा हैचेबिलिटी में वृद्धि हुई।
रोग प्रबंधन : उचित तरीके से स्वास्थ्य की देखभाल करने पर बत्तखों की औसत वार्षिक मृत्युदर 9.34: तक कम हुई। मासिक विश्लेषण से पता चला है कि माह अप्रैल में सर्वाधिक मृत्यु दर (38.74%)तथा मार्च के महीने में न्यून्ताम मृत्युदर (0.39%) थी। मृत्युदर के मुख्य कारणों में आंत्रशोथ (19.83%) उसके बाद परभक्षण (17.93%), दुर्बलता (14.94%), सेप्टिसीमिया (14.13%), इनैनिसन (11.27%), न्यूमोनिया (4.75%), लेज़न आँब्सिक्योर्ड (3.8%), हेपेटाइटिस (2.71%), एग बाउन्ड (1.90%), अंधता (1.76%), स्टेम्पेडे (1.49%) तथा कैनीबॉलिज्म (1.22%) आदि हैं।
बत्तखों का रक्तविज्ञान :
तीन अलग-अलग नस्लों की बत्तखों के भिन्न-भिन्न पैरामीटरो के साधारण मान को आंकलित किया गया। देशी, खाकी तथा हवाइट पेकिन बत्तखों के आंकलित मान क्रमशः 10.05, 9.29, 10,50, PCV 37.22, 34.20, 37.00; RBC 4.95, 6.98, 4.88 WBC 12711.40, 13349.00, 16956.50; ESR (1 घण्टा), 4.14, 4.15, 2.18, ESR (2 घण्टे) 8.31, 7.57, 4.81 थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बत्तख की इन नस्लों में Hb, PCV, RBC में बहुत अधिक भिन्नता नहीं है, परन्तु WBC, RBC तथा ब्लीडिंग टाइम अलग-अलग है। बत्तख की नस्लों में लिम्फोसाइट न्यूट्रॉफिल की अलग-अलग गणना से इन पक्षियों में भिन्नता दिखाई देती है। यद्यपि, अन्य पैरामीटरों में बहुत अधिक भिन्नता नहीं थी।
जीवाणुओं की पहचान तथा उनका अलगाव:
मल तथा आन्तरिक अवयवों जैसे किडनी, लीवर के कुल 15 नमूनों का परीक्षण किया गया तथा माइक्रोस्कोपी संवद्धर्न, जैव रासायनिक तथा आणविक चरित्रीकरण के द्वारा प्रोटीयस मिरेबिलिस, सालमोनेल्ला पुलोरम तथा ई-कोली जैसे जीवाणुओं का पता लगाया गया।
प्राेटियस मिरेबिलिस के अलगावों का एण्टीबायोग्राम :
प्राेटियस मिरेबिलिस, सिप्राेलोक्सासिन, अफलाक्सासिन, इनरोफ्लाक्सासिन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं, क्लोराम्फेनीकोल, कानामाइसिन तथा स्ट्रेप्टोमाइसिन के प्रति मध्यम संवेदनशील है, परन्तु क्लोक्सासिलीन तथा डॉक्सीसिलीन के प्रति प्रतिरोधी है। रोग कारकता परीक्षणों से 12.33: रोगजनक के लक्षण स्पष्ट हुए हैं।
बत्तख सालमोनेलोसिस की सीरोप्रीवैलेन्स :
सालमोनेल्ला प्रतिजन (सालमोनेल्ला पूलोरम) के प्रति बत्तख से कुल 188 सेरा नमूनों को स्लाइड एग्लूटिनेसन द्वारा परीक्षण किया गया, जिनमें से 12 नमूने (6.4%) सकारात्मक पाए गए।