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भा. कृ. अनु. प. - केन्द्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान
ICAR - CENTRAL AVIAN RESEARCH INSTITUTE
AN ISO 9001:2008 CERTIFIED INSTITUTE
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कुक्कट पालन एवं उत्पादन से संबंधित अनुसंधानः

स्थापना से लेकर अब तक कुक्कुट पालन के विभिन्न विषयों से जुड़े़ अलग-अलग विभागों जैसे- पक्षी अनुवांशिकी एवं प्रजनन, पक्षी पोषण एवं आहार प्रौद्योगिकी, पक्षी दैहिकी एवं पुनरोत्पादन, उत्पादनोत्तर प्रौद्योगिकी आदि में शोध जारी है। प्रत्येक विभाग में अनुसंधान परियोजनाओं के साथ-साथ परीक्षण एवं प्रशिक्षण का कार्य भी किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त संस्थान द्वारा कुक्कुट प्रसार पर भी सम्बंधित अनुभाग द्वारा विभिन्न माध्यमों जैसे-लघु अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम, दूरस्थ प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता शिविरों का आयोजन, क्षेत्र-प्रदर्शन (ग्रामीण परिवेश में पक्षी नस्लों का आंकलन) के माध्यम से संस्थान में विकसित प्रौद्योगिकी का प्रसार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, संस्थान में कम्प्यूटर इकाई भी है, जिसमें विभिन्न अनुसंधानों से जुडे़ आकड़ो का विश्लेषण किया जाता है।

संस्थान में मूलतः नई पक्षी नस्लों के विकास पर काफी बल दिया गया है और संस्थान द्वारा बटेर की चार, बत्तख की तीन, टर्की की तीन, गिनी फाउल की तीन, देशी मुर्गी की चार, लेयर की तीन तथा ब्रायलर की चार नस्लों को विकसित किया गया, जिनकी देश के विभिन्न भागों मे अत्यधिक मांग है। ये सारी प्रजातियाँ, भारतीय कृषि-जलवायु की स्थितियों के अनुकूल विकसित की गईं है तथा विभिन्न कृषि जलवायु परिस्थितियों में उत्पादन करने में सक्षम हैं।

पक्षी पोषण के क्षेत्र में भी संस्थान द्वारा महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित की गईं है, जिसमें विभिन्न पक्षी प्रजातियों के पौषाणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आहार-सूत्र विकसति किये गये है तथा विभिन्न प्रकार के वैकल्पिक आहार स्रोतों का मूल्यांकन किया गया है। पक्षी आवास तथा दैहिकी में भी संस्थान द्वारा कम लागत वाले कुक्कुट आवासों के प्रारूपों की डिजाइन विकसित करना, बटेर एवं मुर्गी के वीर्य तनुकारक (सीमेन डायलूएंट) जैसी कुक्कुट पालन-उपयोगी तकनीके विकसित की गई हैं। संस्थान द्वारा लगभग डेढ़ दर्जन कुक्कुट उत्पाद एवं मूल्यवर्द्धित कुक्कुट उत्पाद विकसित किए गए हैं। अभी तक संस्थान द्वारा सात तकनीकों का व्यावसायीकरण किया जा चुका है तथा सात पेटेन्ट अर्जित किए जा चुके है । इसके अतिरिक्त, यह संस्थान आधुनिक तकनीकों के शोध पर अनुसंधानरत है, जैसे-आण्विक आनुवंशिकी, जैव प्रौद्योगिकी से जुड़ी़ विभिन्न अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियाँ आदि प्रमुख हैं। इन प्रौद्योगिकियों में पक्षी रोग प्रतिरोधकता का आण्विक स्तर पर विश्लेषण इत्यादि भी संस्थान के अनुसंधान कार्यक्रम के महत्वपूर्ण बिन्दु रहें है। पक्षी उत्पादन के क्षेत्र में संस्थान द्वारा विकसित इन ओवोफीडिंग (अण्डे के अन्दर आहार एवं टीकाकरण) की भी तकनीकि का विकास काफी सराहनीय रहा है। त्छ।प द्वारा जीन साइलेसिंग, पक्षियों की आण्विक प्रजातियों के विभिन्नीकरण एवं चरित्रीकरण के लिए आण्विक चिह्नों का विकास, पक्षियों की आंतरिक सूक्ष्मजैवीय परिदृश्य कामेटाजीनोमिक तकनीकी विधि द्वारा विश्लेषण, प्राक एवं प्राग जैविकीय खाद्यों का पक्षी स्वास्थ्य एवं उत्पादन पर अध्ययन किया जा रहा है।

संस्थान द्वारा मानव संसाधन विकास के अन्तर्गत स्नातकोत्तर, पी.एचडी. (डाॅक्टरेट) उपाधियों तथा एनडीपीएच में डिप्लोमा का शिक्षण एवं मार्ग-दर्शन का कार्य संस्थान के विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा किया जा रहा है। विभिन्न प्रकार की महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट उपलब्धियों के कारण संस्थान को अभी तक 26 पुरस्कारों से नवाज़ा जा चुका है।

महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ

जनन-द्रव्य का विकास, आहार, वैकल्पिक आहार स्रोत तथा आहार-सूत्र, कुक्कुट उत्पाद एवं मूल्य वर्द्धित उत्पाद, कुक्कुट आवासों के प्रारूप आदि।